राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव लगातार राजद के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें मरना कबूल है लेकिन राजद में वापस नहीं जाएंगे। इस बयान ने लालू परिवार के अंदर खींचतान को बाहर ला दिया है। तेजप्रताप यादव राजद से निष्कासित होने के बाद अपनी पार्टी बना चुके हैं और कई उम्मीदवारों को टिकट भी दिया है। उनके इस फैसले से चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार वे किसका नुकसान पहुंचा रहे हैं और किसको फायदा। जानकारों का मानना है कि अंततः नुकसान राजद को ही हो रहा है।
महुआ विधानसभा से ठोका है ताल
तेजप्रताप यादव ने राजद से निष्कासित होने के बाद जनशक्ति जनता दल (JJD) बनाया था। इस पार्टी का चुनाव निशान ब्लैक बोर्ड है। इसी पार्टी के तहत वे महुआ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। पहली बार 2015 में वे इस सीट से चुनाव जीते थे। हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में वे समस्तीपुर के हसनपुर विधानसभा से विधायक बने थे।
इस बार वे महुआ से दोबारा मैदान में हैं और राजद उम्मीदवार मुकेश रौशन को टक्कर देते नजर आएंगे। मुकेश रौशन 2020 में राजद के टिकट पर यहां से चुनाव जीते थे। इस बार महुआ के पूर्व विधायक तेजप्रताप यादव और वर्तमान विधायक मुकेश रौशन के बीच जोरदार मुकाबला है। ऐसे में अगर वे यहां से एक बार फिर जीतते हैं तो राजद को एक सीट का नुकसान हो सकता है।
22 उम्मीदवार मैदान में
तेजप्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) ने बिहार में अपने उम्मीदवार भी उतारे हैं। उनकी पार्टी इस बार 22 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने 22 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था। अगर आप प्रत्याशियों पर नजर डालेंगे तो आपको साफ-साफ दिखेगा कि वे राजद को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं।
6 साल के लिए राजद से निष्कासित
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कुछ महीने पहले ही तेजप्रताप यादव को परिवार के साथ-साथ पार्टी से भी 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। उन पर यह कार्रवाई एक तस्वीर के मामले में की गई थी। बाद में मुद्दा बड़ा बनता चला गया और तेजप्रताप यादव ने अपनी पार्टी बनाकर चुनाव में उतरने का फैसला किया। पार्टी और परिवार में जारी घमासान का नुकसान तो राजद को झेलना पड़ सकता है, वहीं इसका बड़ा फायदा भाजपा और NDA को हो सकता है।
