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फिलीपींस में चल रहे आसियान सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिश्ते प्रगाढ़ करने की गर्मजोशी और औपचारिक रिश्तों से परे जाकर साथ निभाने के वादे को करारा झटका लगा है। अमेरिकी कांग्रेस ने फैसला किया है कि पाकिस्तानलश्कर-ए-तोयबा को छोड़ सिर्फ हक्कानी गुट पर कार्रवाई करे तो उसे 70 करोड़ डॉलर की अटकी हुई अमेरिकी सहायता दे दी जाएगी। इससे पहले सितंबर में अमेरिका ने इस सहायता के लिए अफगानिस्तान में आतंक मचाने वाले हक्कानी के साथ भारत में केंद्रित लश्कर- ए- तोयबा पर पाकिस्तानी कार्रवाई की कड़ी शर्त लगाई थी।
विदेश मंत्रालय अमेरिका के इस पैंतरे से निराश और चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत दोभाल के एसियान सम्मेलन से लौटने के बाद भारत इसपर कूटनीतिक विरोध दर्ज कराएगा। गौरतलब है कि तालिबान का हक्कानी गुट अफगानिस्तान में अमेरिका के खिलाफ सख्त है। जबकि 26/11 के मुंबई हमले जैसे आतंकी वारदात को अंजाम देने वाला लश्कर का पूरा फोकस भारत पर है।
