बिहार की राजनीति में भूमिहार वोट बैंक को साधने की दौड़ तेज हो गई है। हाल में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने कई भूमिहार नेताओं को अपने साथ जोड़ा, जिसके जवाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भी सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहानाबाद के पूर्व सांसद अरुण कुमार को एक बार फिर जनता दल (यूनाइटेड) में वापस बुला लिया है। पटना में आयोजित कार्यक्रम में अरुण कुमार और उनके सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता बेटे ऋतुराज कुमार ने जदयू की सदस्यता ली।
कार्यक्रम में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और मंत्री विजय चौधरी मौजूद रहे। अरुण कुमार पूर्व में समता पार्टी और जदयू के संस्थापक सदस्य रह चुके हैं। वह 1999 में जदयू और 2014 में आरएलएसपी से जहानाबाद के सांसद बने थे। मगध क्षेत्र में भूमिहार समाज के बीच उनकी पकड़ मानी जाती है।
मगध की राजनीति में बदलाव की बयार उस समय तेज हो गई, जब राजद ने शुक्रवार को बड़े भूमिहार नेता और घोसी से आठ बार विधायक रहे जगदीश शर्मा के बेटे राहुल शर्मा को पार्टी में शामिल कर लिया। राहुल पहले जदयू विधायक रह चुके हैं। जगदीश शर्मा का राजनीतिक करियर लंबा और प्रभावशाली रहा है, हालांकि चारा घोटाला मामले में उन्हें और लालू यादव को संसद सदस्यता गंवानी पड़ी थी।
राजद की इस चाल के बाद एनडीए ने अरुण कुमार को सामने रखकर भूमिहार वोट जोड़ने की रणनीति बनाई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मगध क्षेत्र में भूमिहार नेताओं की अदला-बदली से 2025 के विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण और भी रोचक हो गए हैं।
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