बिहार चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। BJP का संगठन ग्राउंड पर काफी एक्टिव है और यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी “महाराष्ट्र मॉडल” को दोहरा सकती है। BJP अपने संगठन और रणनीति के दम पर न सिर्फ गठबंधन में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, बल्कि “महाराष्ट्र मॉडल” की तरह बिहार में भी मुख्यमंत्री पद का दावा पेश करने की तैयारी में दिख रही है। चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं और विश्लेषकों की मानें तो महिला वोटरों का रुझान BJP की तरफ दिख रहा है। हाल ही में बिहार में 75 लाख महिलाओं को 10-10 रुपये भी ट्रांसफर किए गए थे।
ग्राउंड पर बेहतर प्लान
भारतीय जनता पार्टी ग्राउंड पर भी काफी मजबूत नजर आ रही है। जिलों और बूथ स्तर पर BJP का संगठन सशक्त है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिशमाई चेहरा पार्टी के पास सबसे बड़ा आधार है। अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना प्रचार अभियान शुरू नहीं किया है, लेकिन वे बिहार में कई रैलियां करने वाले हैं। प्रदेश अध्यक्ष, जिला संयोजक और बूथ समितियों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। भाजपा अब अपनी पूरी फौज बिहार में उतारने वाली है, जिसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज नेता प्रचार करते नजर आएंगे।
महिला फैक्टर काफी अहम
भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस माइक्रो मैनेजमेंट पर है। इसके लिए पार्टी ने बिहार में अनुभवी नेता धर्मेंद्र प्रधान को प्रभारी बनाया है। सोशल मीडिया कैंपेन के साथ-साथ कैंडिडेट सिलेक्शन में भी BJP ने सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। दूसरी तरफ, बिहार में महिला मतदाता राजनीतिक रूप से हमेशा अहम भूमिका निभाती रही हैं। BJP की महिला सशक्तिकरण योजनाओं (Ujjwala, Lakhpati Didi, PM Awas) ने महिला मतदाताओं पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। चुनाव से पहले 75 लाख महिलाओं के खातों में सीधे पैसे भेजना भी एक बड़ा इम्पैक्ट दिखा सकता है।
