बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। एक तरफ पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहीं दूसरे चरण का नामांकन 20 अक्टूबर को खत्म होने वाला है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए जोर-शोर से चुनावी प्रक्रिया में जुटे हुए हैं, वहीं महागठबंधन में अभी भी सीट शेयरिंग को लेकर पेंच फंसा हुआ है। कई सीटें ऐसी हैं जिन पर महागठबंधन की पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते नजर आएंगी। इसके अलावा JMM ने भी महागठबंधन से इतर अपना अलग रास्ता चुन लिया है। जिस तरह से घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि चुनाव से पहले ही महागठबंधन बिखरता नजर आ रहा है।
एक-दूसरे को देंगे चुनौती
सीट शेयरिंग को लेकर स्पष्ट राय न बनने के कारण महागठबंधन की पार्टियां कई सीटों पर एक-दूसरे को चुनौती देंगी। जानकारी के मुताबिक, 7 ऐसी सीटें हैं जिन पर महागठबंधन के भीतर ही फाइट होने वाली है। यानी महागठबंधन की दो पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरेंगी। इनमें बिहार शरीफ, राजापाकर, बछवाड़ा, रोसड़ा, लालगंज, गौड़ाबौराम और वैशाली शामिल हैं।
नहीं सुलझ रहा मतभेद
महागठबंधन में अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा। मुकेश सहनी ने उपमुख्यमंत्री के साथ 60 सीटों पर दावेदारी की थी, हालांकि राजद उन्हें 12 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। सहनी की मांगें लगातार राजद को असहज कर रही हैं। इसके अलावा कांग्रेस को लेकर भी अभी तक स्पष्टता नहीं दिख रही है। कांग्रेस ने जल्दबाजी में नामांकन से पहले 48 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी।
JMM ने बनाई दूरी
महागठबंधन में शामिल हेमंत सोरेन की पार्टी JMM ने भी अपना अलग रास्ता चुन लिया है। महागठबंधन से अलग होते हुए JMM ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इनमें पिरपैंती, मनीहारी, जमुई, चकाई, कटोरिया और धमदाहा शामिल हैं। ये सभी संकेत साफ बताते हैं कि महागठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
