बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। एक तरफ भाजपा का एनडीए गठबंधन है, वहीं दूसरी तरफ राजद का महागठबंधन है। इन दोनों गठबंधनों में सीधी लड़ाई है। अगर बड़ा चेहरा, कैडर और नेताओं के मामले में देखा जाए तो भाजपा काफी मजबूत नजर आ रही है। विश्लेषक अक्सर विश्लेषण करते समय बिहार भाजपा के लिए कहते हैं कि उनके पास बिहार में नेता नहीं हैं। हालांकि बड़े-बड़े विश्लेषक यही गलती कर बैठते हैं। बिहार भाजपा उन राज्यों में शामिल है, जहां उसके सबसे ज्यादा और अलग-अलग क्षेत्रों में लोकप्रिय नेता हैं। इनकी अपनी पहचान है और ये कभी भी चुनावी हवा का रुख बदल सकते हैं।
टॉप पर मोदी का चेहरा
भाजपा के लिए सबसे मजबूत पक्ष उसके पास प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा है, जो अन्य पार्टियों के पास नहीं है। इसके अलावा कल्याणकारी योजनाओं ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया है। पीएम मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे ज्यादा भीड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में दिखती है। वे बिहार में एक रैली कर चुके हैं और उनकी अगली रैली 30 अक्टूबर को होने वाली है।
क्षत्रपों की सेना से भरी है पार्टी
भाजपा में कई ऐसे क्षत्रप हैं जो अपने-अपने इलाकों में खासे लोकप्रिय हैं। कई बिहार भाजपा के नेता हैं जो केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं और अपने क्षेत्रों में भी मजबूत पकड़ रखते हैं। इनमें गिरीराज सिंह, नित्यानंद राय, राजीव प्रताप रूडी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, राधा मोहन सिंह, रवि शंकर प्रसाद और डॉ. संजय जायसवाल जैसे नेता शामिल हैं, जो अपने-अपने इलाकों में काफी लोकप्रिय हैं।
इसके अलावा राज्य की राजनीति करने वाले कई दिग्गज भी पार्टी में हैं। बिहार भाजपा के पास ऐसे कई नेता हैं जो अपने क्षेत्रों में खासा प्रभाव रखते हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, शहनवाज हुसैन, मंगल पांडे और नितिन नबीन जैसे नेता प्रमुख हैं।
लंबी है कतार
पीएम मोदी और बिहार के नेताओं के अलावा केंद्र में भी लंबी कतार है। गृह मंत्री अमित शाह लगातार प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान जैसे बड़े नेता भी मोर्चे पर सक्रिय हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो टॉप पर पीएम मोदी और क्षेत्रीय क्षत्रपों के सहारे भाजपा 70 फीसदी से ज्यादा स्कोर करती नजर आ रही है।
