जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने चुनावी मैदान में नहीं उतरने का ऐलान किया है। चर्चा थी कि प्रशांत किशोर राघोपुर से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने राघोपुर का दौरा भी किया था और तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने का माहौल भी बनाया था। उनके इस फैसले के बाद पार्टी को जो मोमेंटम मिला था, अब उसमें कमी देखने को मिल रही है।
किसे होगा फायदा
अगर प्रशांत किशोर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, तो राघोपुर सीट पर सीधा फायदा तेजस्वी यादव को होता नजर आ रहा है। उम्मीद थी कि अगर प्रशांत किशोर चुनाव लड़ते, तो तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ सकती थीं, लेकिन अब ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। तेजस्वी यादव ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
हालांकि प्रशांत किशोर को जो मोमेंटम मिला था, चुनाव नहीं लड़ने से वह मोमेंटम कमजोर होता दिख रहा है। इसका बड़ा असर भारतीय जनता पार्टी पर भी पड़ सकता है। हाल ही में उन्होंने कई नेताओं पर आरोप लगाए थे, लेकिन अब जब खुद मैदान से हट गए हैं, तो उन आरोपों का असर भी खत्म होता नजर आ रहा है।
जनसुराज 243 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
भले ही प्रशांत किशोर मैदान से हट गए हैं, लेकिन उनकी पार्टी जनसुराज 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जानकारों का कहना है कि 243 सीटों पर लड़ने से उन्हें खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। जनसुराज ने अपने उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी की हैं। पहली लिस्ट में 51 उम्मीदवार शामिल थे, जबकि दूसरी लिस्ट में 66 उम्मीदवारों के नाम हैं। अब सवाल उठ रहा है कि 243 सीटों पर चुनाव लड़ रही पार्टी कितनी सीटों पर जीत हासिल कर पाएगी। चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के अस्तित्व पर अब संकट मंडराता नजर आ रहा है।
बड़े-बड़े दावा हो गए धराशायी
प्रशांत किशोर बड़े-बड़े दावा कर रहे थे, हालांकि उनके इस फैसले से उन दावों की हवा निकलती दिख रही है। प्रशांत किशोर 150 सीटें जीतने का दावा कर रहे थे। उनका कहना था कि अगर उनकी पार्टी को इससे कम सीटें मिलती हैं, तो वह इसे बड़ी हार मानेंगे। लेकिन जिस तरह उन्होंने मैदान छोड़ने का फैसला किया है, उनके ये दावे अब हवा-हवाई साबित होते दिख रहे हैं।
