बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 11 नवंबर को होने वाला है। पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान हुआ था, वहीं दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान होगा। दूसरे चरण में कई सीटें मुस्लिम बहुल इलाकों में आती हैं। 2020 विधानसभा चुनाव से पहले राजद और कांग्रेस का मुस्लिम मतदाताओं पर मजबूत प्रभाव हुआ करता था, हालांकि 2020 के चुनाव के बाद यह स्थिति काफी बदल गई है।
ओवैसी फिर बिगाड़ सकते हैं खेल
2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी 14 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 5 सीटों पर उसे जीत मिली थी। इस बार ओवैसी की पार्टी 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में इस बार भी यह राजद और महागठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है। अगर मुस्लिम मतदाताओं में यह सेंध लगाने में सफल होती है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा गठबंधन को मिल सकता है।
प्रशांत किशोर की मुस्लिम मतदाताओं पर नजर
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में PK फैक्टर भी काफी अहम रहने वाला है। पीके की नजर भी मुस्लिम मतदाताओं पर है। पीके ने जोकीहाट की सीट को काफी दिलचस्प बना दिया है। यहां जनसुराज से तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम मैदान में हैं, जबकि राजद से उनके भाई शाहनवाज आलम चुनाव लड़ रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों भाइयों में कौन बाजी मारता है या कोई तीसरा उम्मीदवार इसका फायदा उठा लेता है।
