बिहार विधानसभा चुनाव से पहले NDA ने रविवार को सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया है। NDA गठबंधन के दो अहम सहयोगी BJP और JDU इस बार बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। बिहार में भाजपा और जदयू की दोस्ती पिछले 25 वर्षों से चली आ रही है, लेकिन पहली बार ऐसा होगा जब दोनों पार्टियां ‘बड़े भाई’-‘छोटे भाई’ की भूमिका से बाहर आकर ‘जुड़वा भाई’ की तरह चुनाव लड़ते नजर आएंगी। भाजपा पहली बार छोटे भाई की भूमिका से बाहर निकलकर अब बराबरी की स्थिति में दिखाई देगी। अगर इतिहास उठाकर देखें तो 2005 से 2020 के दौरान हमेशा जदयू भाजपा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ी है। इस दौरान नीतीश कुमार ने दो बार पाला बदला, लेकिन दोनों के रिश्ते कायम रहे।
2005 से शुरू हुई ‘बड़े भाई’ की भूमिका
भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) पहली बार फरवरी 2005 में एक साथ चुनाव लड़ी थीं। 243 विधानसभा सीटों वाले इस चुनाव में जदयू जहां 138 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, वहीं भाजपा ने 105 सीटों पर किस्मत आजमाई थी। हालांकि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने के कारण अक्टूबर 2005 में फिर चुनाव हुआ। इस चुनाव में जदयू 139 सीटों और भाजपा 104 सीटों पर मैदान में उतरी थी। फिर आया 2010 का साल, इस चुनाव में जदयू 141 सीटों और भाजपा 102 सीटों पर चुनाव लड़ी। इस चुनाव में बंपर जीत दर्ज करते हुए जदयू को 115 सीटें, वहीं भाजपा को 91 सीटों पर जीत मिली।
2020 तक कायम रहा सिलसिला
2015 के चुनाव में नीतीश कुमार NDA को छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए। इस दौरान राजद और जदयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ी थीं। बाद में नीतीश कुमार फिर से NDA में शामिल हो गए और आया 2020 का विधानसभा चुनाव। 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार एक बार फिर बड़े भाई की भूमिका में नजर आए और 115 सीटों पर चुनाव लड़े। इस चुनाव में भाजपा 110 सीटों पर उतरी थी।
पहली बार बराबर सीटों पर लड़ेंगे चुनाव
भाजपा और जदयू 2025 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि इसकी शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव में ही हो गई थी। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा जहां 17 सीटों पर उतरी थी, वहीं जदयू के खाते में 16 सीटें गई थीं। हालांकि दोनों ही पार्टियों को 12-12 सीटों पर जीत मिली थी।
अब विधानसभा चुनाव में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि दोनों ‘जुड़वा भाई’ की भूमिका में नजर आएंगे। रविवार को NDA ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया है। भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, वहीं चिराग पासवान को 29 सीटें मिली हैं। इसके अलावा जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 6-6 सीटें दी गई हैं।
क्या बिहार को पहली बार मिल सकता है BJP का CM?
बिहार में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बनने की मांग लंबे समय से भाजपा कार्यकर्ता करते आए हैं। वर्तमान में भी भाजपा के पास जदयू से अधिक विधायक हैं, लेकिन भाजपा ने फिर भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया हुआ है। अब जब दोनों पार्टियां बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। अगर भाजपा को ज्यादा सीटें मिलती हैं, जैसा कि पिछले चुनाव में देखने को मिला था, तो संभावना है कि इस बार भाजपा मुख्यमंत्री बना सकती है।
ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र में भी देखने को मिला था, जहां एकनाथ शिंदे चुनाव से पहले मुख्यमंत्री जरूर थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को बंपर जीत और अधिक सीटें मिलने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बने थे। वहां की स्थिति भी लगभग बिहार जैसी ही थी। चुनाव से पहले कम सीटों के बावजूद भाजपा ने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया था, ठीक वैसे ही जैसे बिहार में कम सीटों के बावजूद नीतीश कुमार को बनाया है। हालांकि, कार्यकर्ताओं की भारी मांग के बीच यह यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाती है?
