बिहार चुनाव की चर्चा आजकल हर जगह हो रही है। मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह चर्चा भाजपा और एनडीए की हो रही है। जिस तरह से 75 लाख महिलाओं के खातों में 10000 रुपये ट्रांसफर हुए हैं, विश्लेषकों का मानना है कि इसने पूरे चुनावी माहौल को भाजपा और एनडीए के पक्ष में मोड़ दिया है। लोगों का मानना है कि ऑपोजिशन चुनाव से पहले ही हारा हुआ नजर आ रहा है।
विपक्ष नदारद
बिहार चुनाव में विपक्षी महागठबंधन पूरी तरह चुनावी गेम से बाहर नजर आ रहा है। राजद और महागठबंधन की चर्चा काफी कम हो रही है। महागठबंधन के मुकाबले ग्राउंड और सोशल मीडिया पर जनसुराज और प्रशांत किशोर ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। तेजस्वी यादव की चर्चा बेहद कम हो रही है। सीट शेयरिंग में महागठबंधन के अंदर उठापटक देखने को मिली है, जिसका असर गठबंधन की एकजुटता पर पड़ा है। कई ऐसी सीटें हैं जिन पर महागठबंधन के उम्मीदवार आपस में ही लड़ रहे हैं।
10000 रुपये निभाएगा अहम रोल
बिहार चुनाव में 10000 रुपये की भूमिका काफी अहम हो सकती है। चुनाव से पहले 75 लाख महिलाओं के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इससे पहले मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड में यह ट्रेंड देखा गया है कि महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर हुआ पैसा पूरे चुनाव को प्रभावित कर देता है और विपक्ष को साफ कर देता है। अगर यही ट्रेंड बिहार में भी लागू होता है, तो विपक्ष का सुपड़ा साफ हो सकता है।
