मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद अयोध्या में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ संवाद बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की मंडलीय समीक्षा की और आगामी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शासन और समाज के बीच संवाद की नई परंपरा को स्थापित करते हुए, जनता की भागीदारी को विकास यात्रा की प्रमुख धुरी बताया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास योजनाओं में नियमितता, समयबद्धता, गुणवत्ता और जनसहभागिता शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जनता के सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए और सभी समस्याओं का समेकित, समन्वित एवं त्वरित समाधान हो। विकास कार्यों की भूमि चयन की प्रक्रिया 15 सितंबर के बाद जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श कर पूरी की जाए और निर्माण स्थल पर उनके नामों की पट्टिकाएं भी लगाई जाएं। कार्यों में अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की आवश्यकताओं से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दें और उपलब्ध संसाधनों का पारदर्शी ढंग से जनहित में सदुपयोग सुनिश्चित करें। छोटे-छोटे कार्य नगर निकाय, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर पूरे कराए जाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रत्येक वार्ड में स्वच्छता समिति सक्रिय रहे और जलनिकासी एवं साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर हो। धार्मिक और पर्यावरणीय स्थलों का समेकित विकास हो और उनसे जुड़ने वाले संपर्क मार्ग सुगम हों।
मुख्यमंत्री ने “प्रधानमंत्री प्रेरणा समेकित योजना” के अंतर्गत 1,000 से अधिक धार्मिक स्थलों पर समेकित विकास एवं जन सुविधाओं के निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक प्रेरणा स्थल के चयन की आवश्यकता बताई, जिससे न केवल धार्मिक प्रेरणा केंद्रों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने इन योजनाओं को क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक सोच से भी जोड़ने की बात कही।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है केवल समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन की। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए सड़क, पुल, ओवरब्रिज, धार्मिक स्थलों तक पहुँच मार्ग एवं जर्जर गांवों की सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्रता से शुरू किया जाए। साथ ही, जनपद मुख्यालय को 4-लेन और ब्लॉक मुख्यालयों को 2-लेन से जोड़ने का कार्य भी तेजी से पूरा किया जाए।
नगर विकास विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक योजना के प्रस्ताव से पूर्व संबंधित अधिकारी या जनप्रतिनिधि से सुझाव अवश्य लें ताकि योजनाएं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप और जनहितकारी बन सकें। विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक कार्य पारदर्शी, गुणवत्तायुक्त और जनहितकारी होना चाहिए।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने क्लस्टर परिसर में पीपल का पौधा भी रोपित किया। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को जनता की आवश्यकताओं से जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी दी। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री विजय किशोर सिंह ने जानकारी दी कि अयोध्या मंडल के अंतर्गत आने वाले जनपदों में अब तक 17 विधायक निधि बैठकों में ₹4,771 करोड़ के 1,248 विकास कार्य जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इनमें सड़क, पुल, बाढ़ नियंत्रण, नगर विकास, जलनिकासी, औद्योगिक परिसर, विद्युत और कृषि संबंधी कार्य प्रमुख हैं।
इस अवसर पर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सतीश द्विवेदी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रमुख सचिव नगर विकास श्री अमृत त्रिपाठी, प्रमुख सचिव प्रेरणा श्री एके शर्मा, और शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
