(Jagran)
आपदा प्रबंधन के लिए सभी जिलों में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के भवन बनाए जाएंगे। इस संदर्भ में राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग के सामने जिलों में डीडीएमए के भवन बनाने का प्रस्ताव रखा है।
वर्तमान में एसडीआरएफ और एसडीएमएफ के नियम इसकी अनुमति नहीं देते हैं। साथ ही, सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर बेहतर प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के लिए एक प्रतिशत प्रशासनिक खर्च की अनुमति देने की भी मांग की है।
प्रदेश में पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य अधिसूचित आपदाओं से 4,534 व राष्ट्रीय आपदाओं से 176 लोगों की मृत्यु हुई थी। इसके मद्देनजर सरकार ने राज्य अधिसूचित लू, वज्रपात, असमय वर्षा, तूफान, सर्प दंश और डूबने की घटनाओं को राष्ट्रीय आपदा सूची में शामिल करने का भी प्रस्ताव वित्त आयोग को दिया है।
साथ ही यह मांग भी की है कि राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीएमएफ) के नियमों में बदलाव किया जाए, जिससे अगर किसी एक मद में खर्च न हो, तो बजट का उपयोग दूसरी जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
वहीं, आयोग से राज्य अधिसूचित आपदाओं के लिए खर्च की सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की मांग भी की गई है। इससे आपदा प्रबंधन को लेकर पर्याप्त संसाधन एकत्र किए जा सकेंगे।
वहीं, आयोग से राज्य अधिसूचित आपदाओं के लिए खर्च की सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की मांग भी की गई है। इससे आपदा प्रबंधन को लेकर पर्याप्त संसाधन एकत्र किए जा सकेंगे।
राज्य द्वारा अधिसूचित आपदा से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर चार लाख रुपये की आर्थिक मदद पीड़ित परिवार को की जाती है और घायल होने पर सरकारी अस्पताल में निश्शुल्क उपचार कराया जाता है।
