भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार 8 अगस्त 2025 को नागालैंड के उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से “पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा का विकास” विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है। यह कार्यक्रम कोहिमा, नागालैंड स्थित कैपिटल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा।
प्रदर्शनी का उद्घाटन नागालैंड के राज्यपाल श्री ला. गणेशन द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर नागालैंड के उच्च शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री श्री तेम्जेन इम्ना अलोंग और संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं अभिलेखागार महानिदेशक श्री समर नंदा भी उपस्थित रहेंगे।
प्रदर्शनी की प्रमुख विशेषताएं:
यह प्रदर्शनी पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा के विविध पहलुओं को व्यापक रूप से दर्शाती है। इसमें शामिल हैं:
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जनजातीय परंपराएं
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भाषाई विविधता
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मिशनरी प्रभाव
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औपनिवेशिक विरासत
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स्वतंत्रता के बाद के विकास
यह पहल क्षेत्र की समृद्ध शैक्षिक यात्रा को उजागर करती है – मौखिक आदिवासी ज्ञान प्रणाली से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक की यात्रा। साथ ही, यह शिक्षा को समावेशी और क्षेत्रीय विकास से जोड़ने वाली नीतियों और संस्थानों की स्थापना पर भी प्रकाश डालती है।
प्रदर्शनी में मूल अभिलेखीय दस्तावेजों के माध्यम से इस शैक्षिक विरासत को विषयगत वर्गों में प्रस्तुत किया गया है। इनमें शामिल हैं:
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सरकारी फाइलें
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प्रसिद्ध हस्तियों के निजी पत्र और दस्तावेज
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दुर्लभ पांडुलिपियां
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ऐतिहासिक तस्वीरें
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नागालैंड राज्य अभिलेखागार और भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त अभिलेख
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार: एक संक्षिप्त परिचय
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार, संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक अधीनस्थ कार्यालय है। इसकी स्थापना 11 मार्च 1891 को कोलकाता में ‘इम्पोरियम रिकॉर्ड्स डिपार्टमेंट’ के रूप में हुई थी। राजधानी के दिल्ली स्थानांतरण के बाद इसका वर्तमान भवन वर्ष 1926 में प्रसिद्ध वास्तुकार सर एडविन लुटियंस द्वारा डिज़ाइन किया गया। कोलकाता से दिल्ली में अभिलेखों का स्थानांतरण 1937 में पूरा हुआ।
यह संस्था लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और लोक अभिलेख नियम, 1997 के कार्यान्वयन हेतु नोडल एजेंसी है।
संग्रह की समृद्धि
वर्तमान में अभिलेखागार में 34 करोड़ से अधिक पृष्ठों का भंडार मौजूद है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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सरकारी फाइलें, खंड, मानचित्र
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विधेयक, संधियां, राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत दस्तावेज
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प्राचीन पांडुलिपियां (संस्कृत, फारसी, उड़िया आदि में)
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निजी पत्रावली, यात्रा वृत्तांत
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जनगणना अभिलेख, संसद-विधानसभा बहसें
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निषिद्ध साहित्य और गजेटियर
यह प्रदर्शनी पूर्वोत्तर भारत की शैक्षिक यात्रा की एक दुर्लभ झलक प्रदान करती है, और शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक दस्तावेजों की अमूल्य भूमिका को सामने लाती है।
