(Jagran)
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का नभ नेत्र ड्रोन इस वर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में तैनात रहेगा। ड्रोन से हरिद्वार के भीड़-भाड़ वाले स्थानों, सड़कों, घाट व पुलों की निगरानी की जाएगी। राज्य और जिला आपातकालीन परिचालक केंद्र से ड्रोन के विजुअल्स की लगातार निगरानी की जाएगी। प्रदेश में कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू हो रही है। यात्रा को लेकर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शनिवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद स्वरूप ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि आइआरएस की अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं एवं आकस्मिकता का प्रभावी तरीके से सामना करने में उपयोग साबित हो सकता है। उन्होंने कांवड़ यात्रा से संबंधित जिलों के अधिकारियों से आइआरएस प्रणाली को अपनाने तथा इसके तहत ही यात्रा को लेकर आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से योजना बनाने को कहा।
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के सफल संचालन को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय होना जरूरी है। उन्होंने सभी विभागों से सिंगल प्वाइंट आफ कांटेक्ट के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी को नामित करने और उनकी सूची साझा करने के निर्देश दिए। कांवड़ यात्रियों के मोबाइल में डाउनलोड कराया जाएगा सचेत एप कांवड़ यात्रा में आने वाले कांवड़ियों के मोबाइल फोन में सचेत एप डाउनलोड किया जाएगा। इस एप के जरिए कांवड़ियों को मौसम संबंधी सूचनाएं व अलर्ट मिल सकेगा।
इसके साथ ही टोल फ्री नंबर 112, 1070 और 1077 के बारे में भी कांवड़ियों को जानकारी दी जाएगी। वे आपात स्थिति में इन नंबरों में फोन कर मदद ले सकते हैं। गंगा घाट में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ होगी तैनात गंगा घाटों पर भी कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। यहां एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस के अलावा 60 आपदा मित्र भी तैनात किए जाएंगे।
एनडीआरएफ की एक टीम कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में तैनात रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर देहरादून से अतिरिक्त टीमों को रवाना किया जाएगा। वन्य जीवों की सुरक्षा के इंतजाम कांवड़ यात्रा के दौरान यात्रियों की वन्य जीवों से सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। वन विभाग ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करने के साथ ही वहां सुरक्षा के समुचित प्रबंध करेगा।
