बिहार में चुनावी तैयारी तेज हो गई है। सभी पार्टियां जोर-शोर से चुनाव लड़ रही हैं। एक तरफ एनडीए गठबंधन है, वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन है। महागठबंधन के MY समीकरण की खूब चर्चा होती है, लेकिन एनडीए ने इस चुनाव में MY समीकरण को नए सिरे से परिभाषित किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एनडीए का MY समीकरण राजद के MY समीकरण पर भारी पड़ सकता है।
क्या है एनडीए का MY समीकरण
एनडीए के MY समीकरण में दो प्रमुख ग्रुप शामिल हैं- पहला है महिला और दूसरा है युवा। बिहार चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए सरकार ने 75 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। जिन महिलाओं के खातों में यह पैसा ट्रांसफर हुआ, उन्हें उम्मीद है कि चुनाव बाद अपने खुद के रोजगार के लिए और आर्थिक सहायता मिल सकती है। इसके अलावा महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के ट्रेंड को देखें तो महिलाओं के खातों में गया पैसा एकतरफा जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा चुका है।
राजद के लिए हो रही मुश्किल
राजद के MY समीकरण की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इससे दूसरे ग्रुप को जोड़ने में पार्टी को सफलता नहीं मिल रही है। मुसलमान और यादव के अलावा राजद अन्य जातियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसमें उसे बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। दूसरी ओर, एनडीए गठबंधन ने विभिन्न जातियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रिय छवि भी एनडीए के पक्ष में एक बड़ा फैक्टर है। कुल मिलाकर देखें तो इस चुनाव में राजद के MY समीकरण के मुकाबले भाजपा का MY समीकरण कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है।
