बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। एक तरफ NDA ने सीट शेयर का ऐलान करते हुए उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है, वहीं महागठबंधन में अभी सीट शेयरिंग को लेकर फैसला नहीं हुआ है। महागठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी दल होने के नाते तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले चरण का नामांकन अब 17 तारीख को होने वाला है, ऐसे में हालात से साफ नजर आ रहा है कि BJP, RJD से काफी आगे निकल चुकी है।
तेजस्वी के लिए पिछला प्रदर्शन दोहराना बन रहा चुनौती
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में RJD ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से उसे 75 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछला प्रदर्शन दोहराना तेजस्वी यादव के लिए मुश्किल है। ग्राउंड से जो खबरें आ रही हैं, उनसे पता चल रहा है कि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार तेजस्वी यादव पहले जितने एक्टिव नजर नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा RJD के ‘MY’ समीकरण में बड़ी चुनौती असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी बनी हुई है। ओवैसी की पार्टी ने RJD से 6 सीटें मांगी थीं, लेकिन RJD ने देने से इंकार कर दिया।
ऐसे में ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बुधवार को चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी (AJP) के साथ चुनावी गठबंधन कर लिया है। ये तीनों पार्टियां कुल 64 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जिनमें AIMIM 35 सीटों पर दमखम दिखाएगी। इससे मुस्लिम मतदाता बड़े पैमाने पर RJD से छिटकने की संभावना है। इसके अलावा प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज की नजर भी मुस्लिम मतदाताओं पर है। ऐसे में ये पार्टियां जितनी मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएंगी, उतना ही RJD को नुकसान होने की उम्मीद है।
चिराग पासवान NDA के साथ
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले चुनाव में RJD को अधिक सीटें जीतने के पीछे चिराग पासवान भी एक बड़ी वजह थे। 2020 के चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने 135 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जो सभी JDU के खिलाफ थे। हालांकि, 2020 के चुनाव में 135 सीटों में से चिराग की पार्टी को केवल 1 सीट मिली थी, लेकिन उसे 6 फीसदी वोट मिले थे। ऐसे में अब जब चिराग पासवान NDA के साथ हैं, तो माना जा रहा है कि बड़ा वोट बैंक NDA की ओर शिफ्ट हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो तेजस्वी यादव के लिए पिछला प्रदर्शन दोहराना मुश्किल हो सकता है।
महागठबंधन में सीट शेयरिंग बन रही चुनौती
तेजस्वी यादव को अभी NDA से नहीं, बल्कि खुद की महागठबंधन की पार्टियों से लड़ना पड़ रहा है। कांग्रेस 60 सीटों से कम पर लड़ने को तैयार नहीं है, वहीं RJD 58 से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है। इसके अलावा मुकेश सहनी लगातार दबाव बना रहे हैं और 20 सीटों पर अड़े हुए हैं। वहीं सीट शेयरिंग से पहले ही माले ने 18 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है और वामपंथी दल भी 7 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतार चुके हैं।
