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    सीएम साहब मुश्किल नहीं है बेईमान अफसरों को पहचानना

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    By Aruna Sharma on April 11, 2017 UP/STATES
    (India Inside News)
    ईमानदार अफसर नहीं लगाते कलेक्टर- एसएसपी  की कुर्सी के लिए जुगाड़
    – बेईमान पैर छुएंगे, चमचागीरी करेंगे, रकम भी लुटाएंगे बस कुर्सी चाहिए
    ——————————————————————————
    ईमानदार सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार को अगर कोई कलंक लगा सकता है तो वो सिर्फ प्रदेश के भृष्ट प्रमोटी आईएएस अफसरों की लॉबी है। बेईमानी इस लॉबी की नस – नस में समां चुकी है। ये अफसर सत्ता में बैठे लोगों के साथ ऐसा मीठा बर्ताव करते हैं कि हर कोई चकमा खा जाए। लेकिन इन घूसखोर अफसरों को पहचानना इतना मुश्किल भी नहीं है। बल्कि सावधानी से रीड किया जाये तो ये बेईमान अफसर बेहद आसानी से ट्रेस हो जाते हैं।
    अब प्रदेश की जनता जानती है कि सीएम की कुर्सी पर एक ईमानदार नेता योगी आदित्यनाथ बैठे हैं जिनकी आंखों में ये भृष्ट अफसर धूल नहीं झोंक सकते, जैसे पहले मुख्यमंत्रियों की आंखों में झोंकते रहे हैं। लेकिन भृष्ट अफसर अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं, इनकी आंखें तब खुलेंगी जब ये सुस्पेंड होंगे।
     सीएम योगी आदित्यनाथ की पारखी नजरें चापलूसी का लावादा ओढ़े इन घूसखोर अधिकारियों को पहचानकर उन्हें सही अंजाम तक पहुचाना ठीक से जानती हैं।
    दरसअल ये बेईमान अफसर खुद को बड़े ही आध्यात्मिक और धार्मिक प्रवर्ति का दर्शाते हैं। ज्ञान की बातें करते हैं
    लेकिन भरस्टाचार से रकम कामना इनका एकमात्र एजेंडा होता है। इनकी सीधी पहचान ये होती है कि ये डीएम – एसएसपी और दूसरे महत्वपूर्ण मलाईदार पदों पर तैनाती पाने के लिये मंत्री, विधायक यहां तक की सत्ताधारी दल के छोटे- छोटे नेताओं तक के पैर छूने में गुरेज नहीं करते। बड़ा सवाल ये है कि यदि ये अधिकारी ईमानदार हैं तो फिर डीएम- एसपी और दूसरी मलाईदार पोस्टिंग के लिए अपना स्वाभिमान सम्मान तक पर रखकर जहां- तहां नेताओं के पैर छूते क्यों घूमते हैं। जबकि डीएम की पोस्ट बहुत तनाव देने वाली होती है यहां लगातार दिन रात 24 घंटे काम करना पड़ता है। डीएम की सीट पर तमाम नेताओं, विधायको, मंत्रियों और यहां तक की मीडिया के भी नखरे उठाने पड़ते हैं। डीएम रहते अधिकारी अपने परिवार अपने बच्चों को भी वक़्त नहीं दे पाती। ट्रांसफर का कभी पता नहीं होता कब हो जाये।सवाल है कि फिर भी ऐसे भृष्ट अधिकारी आखिर क्यों डीएम- एसपी बनने के लिए तमाम तरह के जुगाड़ लगाते हैं, पैसा खर्च करते हैं और इधर-  उधर पैर छूते घूमते हैं। इसका सीधा जवाब है घूस का लालच। क्योंकि इन कुर्सियों पर मोटी घूस मिलती है लिहाजा यहाँ तैनाती पाने के लिये ये अफसर पैसे को पानी की तरह बहाते हैं। जाहिर है कि रकम बहाकर आने वाले इन बेईमान अफसरों का एजेंडा जनता की सेवा करना नहीं सरकारी खजाने से रकम बटोरना होता है।
    सीएम साहब! आपकी सरकार में भी ये बेईमान अफसर जोड़तोड़ में लग गए हैं। कुछ विधायको ने ऐसे अफसरों की पोस्टिंग कराने के ठेके भी ले लिए हैं। बेईमान अफसरों से रकम पकड़ चुके विधायक अपने करीबी मंत्रियों को इसमें शरीक कर रहे हैं। इसके बाद मंत्री और विद्यायक मिलकर संघ के अहम् लोगों से ऐसे बेईमान अफसरों की तारीफ कर रहे हैं। यदि इस चैनल से ये बेईमान अधिकारी तैनाती पाने में कामयाब हो जाते हैं तो इससे एक ईमानदार सरकार की छवि तो ख़राब होगी ही संघ के पदाधिकारियों के दामन पर भी इन गन्दगी के छींटे जरूर पड़ेंगे। बेईमान अफसर अपनी तैनाती के लिए विधायको के जरिये सबसे ज्यादा डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, केशव मौर्र्य, राजनाथ सिंह, सुरेश खन्ना, महेश शर्मा, मनोज सिन्हा, सुनील बंसल आदी पर फोकस कर रहे हैं।
    कुछ शातिर प्रमोटी आईएएस अधिकारी तो पोस्टिंग के लालच में गौरखपुर में साधू – महात्माओं और प्रेस मीडिया वालों के भी पैर छूने लगे हैं। यदि सिफारिश करने वालों को दंड मिलना शुरू हो जाये तभी ऐसे बेईमान अफसरों को भरस्टाचार करने से रोका जा सकता है।
    प्रदेश की जनता को नए मुख्यमंत्री से विकास और न्याय की बहुत अधिक उम्मीदे हो गयी हैं। ये तभी संभव है जब महत्वपूर्ण पदों पर ईमानदार कर्मठ और लगनशील अधिकारी तैनात हों।
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    Aruna Sharma

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